पल वो पल

पल वो पल जिनका हमें है इंतजार
पल वो पल जो हमें करें बेकारार
फिसल जातें हैं वो इस क़दर
जैसे शुरू ही ना हो यह सफ़र

वो लातें है खुशियों का बहार
उनके साथ लगता है त्योहार
पर वो रोके ना रुके दीदार
वो पल छूट जये हरबार 

जनम जनम का यही करार
कभी तो रुक जाओ मेरे यार
तुम बिन जीना है निराधार
उस पल पे है जान निसार

क्यों हैं हम हालात के शिकार
किस खता के हम हैं गुनेगार 
पल पल हम पछताएं बार बार 
कब खुदा सुनेगा यह पुकार

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